Lie in the AAP Satyagraha - India Today

It's the lie in the Aam Aadmi Party satyagraha, and it's been nailed in the Delhi High Court. The Delhi government on Tuesday told the high court that the AAP government did not allocate any funds to finance the Rs.6 crore subsidy that it had announced for those who did not pay their electricity bills from October 2012 to May 2013. The lack of funds means no one will benefit from the scheme.


Don't pay your electricity bills, AAP leader Arvind Kejriwal had told Delhi's power consumers as he went about climbing electric poles and getting his pictures taken restoring power connections last year. Over 24,000 didn't, between October 2012 and December 2013. Then Kejriwal came to power.
In February this year, AAP had announced a reward for these power bill defaulters, declaring that those who did not pay their power bills between October 2012 and April 2013 will have to pay only half the amount.

This scheme was to benefit those who had supported the Aam Aadmi Party's Bijli Satyagraha, a campaign against allegedly inflated electricity bills. The AAP decision was meant to benefit 24,036 people across the capital.

On Tuesday, the counsel for the state submitted an affidavit before a division bench of the high court comprising acting Chief Justice B. D. Ahmed and Justice Sidharth Mridul that former chief minister Arvind Kejriwal's decision to offer 50 per cent waiver on power arrears for people who did not pay their bills from October 2012 to December 2013 cannot be implemented due to non-allocation of funds for the same in the budget for 2013-14.

Taking into note the above submission, the High Court continued its stay on AAP's decision to give 50 per cent waiver on pending electricity bills of 24,036 consumers. The Court has fixed the matter for final hearing on May 22 this year.


Filing the affidavit on behalf of the Delhi government, Madhu Sudan, deputy secretary of power, told the court, "The competent authority of the government had not made any provision in the budget for release of funds for the purpose and in the absence of the availability of funds, therefore, in the present circumstances, it is not possible to implement the decision of the cabinet for providing relief to the electricity consumers who stopped paying their bills anytime between October 2012 and May 2013 till December 2013."
The bench was hearing a Public Interest Litigation(PIL)filed by advocate Vivek Narayan Sharma, who also sought quashing the Delhi government's decision to close power theft cases registered against 2,508 consumers last year. The plea said that such an action of the government was like "sponsoring and abetting criminal or terrorism acts and acts against rule of law and constitution." Power tariff in Delhi was a prominent campaign issue for AAP in the run up to the Delhi Assembly elections with Kejriwal promising he would slash power tariffs by 50 per cent after being voted to power. After coming to power, the AAP government has come down heavily on power discoms in Delhi, seeking a CAG audit of their accounts.

As per the PIL in the Court, the waiver would have imposed a burden of Rs.6 crore on the state exchequer. more  

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नया इंडिया, 13 मई 2014: मतदान के अंदाजी घोड़े अभी से दौड़ने शुरू हो गए हैँ। नरेंद्र मोदी को अपना दुश्मन मानने वाले टीवी चैनल भी यह कहने को मजबूर हो गए हैं कि भाजपा को कम से कम 250 सीटें तो मिलेंगी ही। कोई भी चैनल नहीं कह रहा है कि कांग्रेस को 100 से ज्यादा सीटें मिलेंगी। याने भाजपा दुगुनी से भी ज्यादा हो जाएगी और कांग्रेस आधी से भी कम रह जाएगी। इसी तरह मतदान-सर्वेक्षण यह भी बता रहे हैं कि कुछ क्षेत्रीय पार्टियों का तो सूपड़ा ही साफ हो रहा है। जैसे नीतिश के जनता दल का। और कुछ क्षेत्रीय पार्टियां जैसे बसपा और सप भी आधी ही रह जाएंगी। दक्षिण की क्षेत्रीय पार्टियों को भी धक्का लगेगा। इसी प्रकार पं. बंगाल में भी ममता को झटका लगेगा। सबसे बुरा हाल आम आदमी पार्टी का हो रहा है। जिससे सबसे ज्यादा आशा थी, वह सबसे ज्यादा निराश कर रही है। कुल मिलाकर ज्यादातर चैनल अपने सर्वेक्षण के आधार पर कह रहे हैं कि भाजपा को स्पष्ट बहुमत मिल रहा है। किसी चैनल ने अभी तक यह नहीं कहा है कि भाजपा या उसके गठबंधन को 300 या उससे भी ज्यादा सीटें मिल सकती हैं।


ये सभी सर्वेक्षण कितने मतदाताओं से बात करते हैं। 55-60 करोड़ मतदाताओं में वे मुश्किल से कुछ ही लाख मतदाताओं से बात करते हैं। और मनुष्य, मनुष्य होता है, चावल नहीं होता। हंडी का एक चावल पक गया तो सभी चावलों को पका हुआ मान लिया जाता है लेकिन क्या मतदाताओं के बारे भी यही नियम लागू होता है? इसलिए इन मतदान सर्वेक्षणों को मैँ अंदाजी घोड़े कहता हूं। लेकिन ये अंदाजी घोड़े कभी-कभी खरगोश और कभी-कभी कछुए की चाल भी चलते हैं। इसलिए कोई भी सर्वेक्षण 300 से ऊपर सीटें भाजपा को नहीं दे रहा है लेकिन जो लोग लिफाफा देखकर खत का मजमून भांपने की कला के माहिर है, उनका सोचना है कि भाजपा-गठबंधन को 300 से भी ज्यादा सीटें मिलनी चाहिए। वे न ता उम्मीदवारों से पूछते हैं, न मतदाताओं से। न वे थर्मामीटर लगाते हैं और न ही स्टेथस्कोप। वे तो मरीज का चेहरा देखकर मर्ज जान लेते हैं। 16वीं लोकसभा का यह मतदान, यह चुनाव अपने आप में अजूबा था इसलिए इसका नतीजा भी अजूबा होना चाहिए। कहीं ऐसा न हो कि मतदानों का यह नपैना छोटा पड़ जाए? कहीं ऐसा तो नहीं कि ये अंदाजी घोड़े अपनी मंजिल पर पहुंचने के पहले ही हांपने लग गए। more  
प्रियंका वाड्रा ने शिकायत की है कि उनके भाई और मां के चुनाव क्षेत्र में कई लोग ऐसी पुस्तिकाएं बंटवा रहे हैं, जो घोर आपत्तिजनक हैं। ये पुस्तिकाएं वे रात के अंधरे में लोगों के घरों में डलवा रहे हैं। प्रियंका का कहना है कि इन पुस्तकों में गंदी और झूठी बातें लिखी गई हैं। उनकी मां-सोनिया गांधी और भाई राहुल गांधी का चरित्र हनन किया गया है। पुस्तकें बांटने वाले ये लोग डरपोक और कायर हैं। इन पुस्तकों का नाम है- ‘राहुल की रावण लीला’ और ‘सोनिया की बर्बरता और साजिश’ इन पुस्तकों के प्रकाशक के नाम की जगह ‘संस्कृति रक्षक संघ’ छपा हुआ है।


इन पुस्तकों को मैंने नहीं देखा है। मुझे अभी तक किसी ने नहीं भेजी है लेकिन मैं इन्हें पढ़े बिना ही प्रियंका की पीड़ा को समझ सकता हूं। इसके दो कारण हैं। पहला तो तथाकथित ‘सोशल मीडीया’ है। इंटरनेट और एसएमएस के जरिए मेरे पास सोनिया गांधी और राहुल के बारे में इतनी अश्लीलें बातें भेजी गई हैं कि मैं यही अफसोस करता रहा हूं कि मैं लैपटॉप और मोबाइल फोन क्यों रखता हूं? मैंने जितना अपने व्यक्तिगत अनुभव में पाया है, सोनियाजी को सदा शिष्ट और विनम्र पाया है और राहुल ने 2005 में काबुल के राजमहल में एक निजी शाकाहारी डिनर में भाग लिया था, जो बादशाह जाहिर शाह की पड़नातिन और शाहजादे मुस्तफा ने आयोजित किया था। हम सात-आठ लोग ही थे। वहां भी राहुल का व्यवहार अत्यंत संयत और मर्यादित था। लेकिन इंटरनेट पर राहुल को धुर्त्त, भ्रष्ट, झूठा, भौंदू और पता नहीं, क्या-क्या बताया गया है।


प्रियंका की पीड़ा को समझने का दूसरा कारण हमारे नेतागण भी है, जिन्हें सब जानते हैं लेकिन उनके नाम मैं यहां खोलूंगा नहीं। वे मुझसे अक्सर पूछते रहते हैं कि अफगान बादशाह जाहिर शाह की पड़नातिन का नाम क्या है? अब दिग्विजय-कांड के बाद यह प्रश्न और जोर से पूछा जा रहा है।


समझ में नहीं आता कि आपको इतने नीचे स्तर पर उतरने की जरूरत क्या है? कांग्रेस का तो यों ही बेड़ा गर्क है, आप अपना बेडा क्यों गर्क कर रहे हैँ? अपने आपको आप संस्कृति रक्षक कहते हैं, लेकिन इससे अधिक संस्कृति-भक्षण क्या हो सकता है? यदि आप में दम हैं तो आप खुले आम ये आरोप क्यों नहीं लगाते या सोनिया और राहुल को अदालत में क्यों नहीं घसीटते? आप संस्कृति-रक्षा के नाम पर जो कुछ कर रहे हैं, यह अपराध तो है ही, पाप भी है। भारतीय लोकतंत्र को कलंकित करना भी है। more  
Mr. kejriwal is playing the second lead role for congress in India only for prohibitive Modi Ji more  
One thing should be understood. Arvind Kejriwal took AAP as his start-up venture as extension of his NGO. He targeted three categories, elite middle class mind (including those who made it to upper class like Gopinath) and socially activists; who wanted to create their own identity, middle class who wanted a good governance and lower deprived sections; who were suffering from daily ignominy. Elite middle class persons are ruling AAP. Those who could not adjust like Sarabhai or Gopinath or Mrs Bhatti were left in cold. Balance are seeking their fortunes in Politics. Middle class is more or less disillusioned. This is the class which by and large are activated on this forum. Third is the deprived sections of the society. To the credit of AK, right or wrongful means, this sections in Delhi identifies AAP with it. It is true that AAP gave them a voice and street vendors, auto/rickshaw drivers and similar daily earners daily harassment by administrative authorities and police was less and that makes a point to them. They derive satisfaction when AK targets select successful entrepreneurs or politicians. They do not go into the logic and simply follow it. It is tactics similar to Mayawati for Dalit section. unless this section is brought back, the forum shall have limited use more  
Such unscrupulous persons deserve to be exposed right, left and the CENTRE. Shame on their misdeeds. more  
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