कौन जानता था कि अरविंद केजरीवाल जैसा नौसिखिया दिल्ली में शीला दीक्षित को हरा देगा? इसीलिए अब अगर अरविंद ने वाराणसी में नरेंद्र मोदी के खिलाफ कमर कसी है तो यह स्वाभाविक है। यदि शीला दीक्षित को उनकी नाक के नीचे हराया जा सकता है तो मोदी को क्यों नहीं हराया जा सकता है? शीला दीक्षित तो दिल्ली प्रदेश पर 15 साल से हुकूमत कर रही थीं जबकि वाराणसी तो मोदी और अरविंद, दोनों के लिए एक-जैसी है। वाराणसी में दोनों बाहरी हैं। दोनों वहां से पहली बार लड़ रहे हैं।



क्या ये ही तर्क हैं, जिन्हें अरविंद ने अपनी उम्मीदवारी का आधार बनाया है? आधार तो एक दूसरा ही तर्क है। उसके बारे में बाद में बात करेंगे। लेकिन इन तर्कों की भी परीक्षा करें तो अरविंद की उम्मीदवारी का कोई औचित्य सिद्ध नहीं होता। पहली बात तो यह कि यह चुनाव दिल्ली की तरह कोई स्थानीय चुनाव नहीं है। यह राष्ट्रीय चुनाव है। वाराणसी से जो भाजपा का उम्मीदवार है, वह प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार है। दिल्ली की मुख्यमंत्री को हराकर आप मुख्यमंत्री बन गए थे लेकिन वहां बुरी तरह से असफल हुए, रणछोड़दास बन गए। अब आप मोदी को हराकर प्रधानमंत्री की दौड़ में शामिल होना चाहते हैं? पतंगबाजी की भी हद होती है! महत्वाकांक्षा, क्या पागलपन में बदल गई है? आप राजनीतिज्ञ बनना चाहते हैं या विदूषक? खुद अरविंद ने कहा है कि मैं चुनाव जीतने के लिए वाराणसी नहीं आया हूं। तो फिर क्यों आए हैं? मोदी को हराने के लिए!! क्या वाराणसी की जनता को आपने बुद्धिहीन समझ रखा है, जो ऐसी आदमी के लिए अपना वोट खराब करेगी, जो कहता है कि मैं सिर्फ हारने के लिए और हराने के लिए आया हूं।



अरविंद ने कहा अब भ्रष्टाचार नहीं, धर्मनिरपेक्षता असली मुद्दा है। भ्रष्टाचार के मुद्दे पर ही आम आदमी पार्टी बनी और लड़ी। अब आप मुद्दा बदल रहे हैं। क्यों? क्या भ्रष्टाचार खत्म हो गया है? नहीं! तो फिर आप अभी जो कुछ कर रहे हैं, क्या यह उन भ्रष्टाचारियों की मदद नहीं है, जिन्हें हराने के लिए आप पैदा हुए थे? उन्होंने आप के मुंह में मुख्यमंत्री पद का रसगुल्ला रख दिया तो आप उनको अब बनारस के लड्डू खिलाने पर आमादा हो गए हैं।



मोदी ने एके-49 कहकर अरविंद को अनावश्यक प्रचार दिया है। प्रचार ही ‘आप’ का प्राणवायु है। मोदी के विरुद्ध लड़ने की भी यही मूल प्रेरणा है। अरविंद चाहता तो वह सोनिया और राहुल के विरुद्ध भी लड़ सकता था लेकिन सबको पता है कि वे डूबते जहाज के कप्तान हैं। प्रचार तो वहां से भी मिलता लेकिन अमेठी और रायबरेली आज वाराणसी के सामने क्या हैं? बिना चाश्नी की जलेबी हैं। असली केसरिया जलेबी तो वाराणसी में ही है। जीत की जलेबी तो ‘आप’ को मिलने से रही लेकिन प्रचार के पत्तल-दोने ही वे खड़काते रहें तो यह भी क्या कम है? more  

View all 8 comments Below 8 comments
अगला प्रधानमंत्री कौन बनेगा, यह दावे से कौन कह सकता है, लेकिन सभी दलों के नेता जिस एक आदमी के पीछे हाथ धोकर पिल पड़े हैं, उसका नाम है- नरेंद्र मोदी। मोदी का बुखार सब पर सवार है। कोई कहता है मोदी तो ‘राष्ट्रीय विपत्ति’ सिद्ध होगा, कोई मानता है कि वह ‘टुकड़े-टुकड़े कर देगा’, कोई उसे भावी हिटलर बता रहा है और कोई कह रहा है कि बस, उसे एक बार सत्ता में आने दो, फिर देखना देश में दंगों के पटाखों की लडिय़ां फूटने लगेंगी। भविष्य की ये सब आशंकाएं कितनी खरी हैं, इन पर हम आगे विचार करेंगे, लेकिन उक्त कथनों का एक अर्थ तो स्पष्ट ही है। वह यह कि सभी मोदी-निंदक अभी से मान चुके हैं कि अगले प्रधानमंत्री तो नरेंद्र मोदी ही बनेंगे।


तो क्या भारत के अगले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वैसे ही होंगे, जैसा कि उनके विरोधी उन्हें चित्रित कर रहे हैं? यदि वैसा होगा तो यह भारत का बड़ा दुर्भाग्य होगा। तो कैसा होगा, हमारा अगला प्रधानमंत्री? मोदी ने जिस दिन गुजरात में तीसरी बार चुनाव जीता, उसी दिन मैंने ‘भास्कर’ (20 दिसंबर 2012) में लिखा था कि ‘प्रधानमंत्री के द्वार पर मोदी की दस्तक’ और फिर लिखा था कि मोदी के शरीर में जब तक अटलजी की आत्मा का प्रवेश नहीं होता, वे भारत के प्रधानमंत्री नहीं बन सकते। यह बात तब कही गई थी, जब प्रधानमंत्री पद के लिए मोदी का नाम दूर-दूर तक कहीं नहीं था। अब मोदी को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, भाजपा और उसके सहयोगी दलों ने तो प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार मान ही लिया है, विरोधी दल उन्हें भावी प्रधानमंत्री मानकर खुर्दबीन से उनके दोष टटोल रहे हैं।


मोदी-निंदकों का मानना है कि प्रधानमंत्री बनते ही मोदी सबसे पहले भाजपा के अपने साथी-नेताओं को कलम करेंगे, फिर संघ को मुड्डे पर बिठाएंगे और फिर विरोधियों की बोलती बंद करेंगे। इंदिरा गांधी ने सत्तारूढ़ होने के नौ साल बाद आपातकाल लगाया, मोदी यह काम नौ महीने में ही कर डालेंगे। मान लें कि मोदी यही करना चाहेंगे। तो क्या वे यह कर सकेंगे? यह ठीक है कि आज मोदी की लोकप्रियता 1971 की इंदिरा गांधी से कम नहीं है। कुछ ज्यादा ही मालूम पड़ती है, खासतौर से उनकी सभाओं में उमडऩे वाली भीड़ और उसके उत्साह को देखते हुए, लेकिन मोदी इंदिरा गांधी नहीं हैं more  
Janta ki pukar, is bar modi sarkar .... HAR HAR MAHADEV more  
I also CONFESS that I had high hopes from and thus supported AAP in Delhi...; but not again, no way... more  
but Mr. Amit Vo ek Lahar thi AAP ki or public ne socha tha ki arvind ek acha CM sabit hoga.......but Arvind Delhi Ko bech me chodkar chale gai PM banane ke liye.

Ab baat ye uthti hai ki jo delhi ko nahi chala paya vo desh ko kya chala paiga. more  
bahut sahi kha amit bhai..... more  
Post a Comment

Related Posts

    • Is the protest against Farm Bill appropriate ?

      The demand over the several decades by various political parties and agricultural economists have been that the exploitation by the middle men (trading houses) should be put down by enacting stro...

      By N.S. Venkataraman
      /
    • JOURNALISTS AND ACTIVISTS ARE MUCH NEEDED BUT THEY NEED CREDIBILITY TOO

      It is high time that the journalists and activists should take a good look at their own image in the society and search their conscience whether they have always been neutral and unprejudiced.

      By N.S. Venkataraman
      /
    • Government should be committed to population control

      Today, what stands between India and high prosperity index is the huge population, which still continues to increase at alarming level. To control the population growth, Prime Minister M...

      By N.S. Venkataraman
      /
    • CONCEPT OF WORKING FROM HOME - WILL IT STAND THE TEST OF TIME ?

      When the world was attacked by COVID 19 and with no proven drug/vaccine available xfor treating the infected people, social distancing between individuals was advocated as immediate solution to sol...

      By N.S. Venkataraman
      /
    • ARE EVERYONE TIRED OF LOCKDOWN ?

      Now, it appears that both the governments and the public are tired of lockdown. It appears that people have reconciled themselves to live with COVID 19, just as they have been living wi...

      By N.S. Venkataraman
      /
    • DISRESPECT TO CORONA INFECTED DECEASED PERSONS

      It is highly depressing to read news about the local people’s objection to bury / cremate the corona infected deceased persons in their locality. This is happening all over India and par...

      By N.S. Venkataraman
      /
    • COVID 19 - LIFTING LOCKDOWN IN INDIA– A CALCULATED RISK THAT HAS TO BE TAKEN

      A team of management professional, technologists , trader with long experience in their respective field have put their heads together and arrived at suggestions for lifting the lockdown in the f...

      By N.S. Venkataraman
      /
    • MR. MODI SHOULD BAN POLYGAMY TO PROTECT WOMEN’S DIGNITY AND CURB POPULATION GROWTH

      As we celebrate International women’s Day, it is surprising that no one seem to be talking about the practice of polygamy where one man marries several women. This is one of the most uncivil...

      By N.S. Venkataraman
      /
    • DELHI POLICE – SINNED OR SINNED AGAINST ?

      Almost all section of Indian media and most of the critics have blamed the Delhi police for the riots for two days ,when many innocent lives were lost and many were injured and large scale propert...

      By N.S. Venkataraman
      /
    • Someone get this chimpanzee booked

      He is openly challenging Delhi Police and Govt of India. "Trump के जाने तक तो हम शांति से जा रहे। लेकिन उसके बाद हम आपकी भी नही सुनेगे. सड़कें खाली करवाइए तब तक।" "Till Trump...

      By Rajesh Suri
      /
    • Hiow to deal with motivated agitators and terrorists ?

      For the last several days, some members of the Islamic group have been agitating against CAA. Now they are blocking roads in Delhi, Chennai and other places, though the government has assured that ...

      By N.S. Venkataraman
      /
Share
Enter your email & mobile number and we will send you the instructions

Note - The email can sometime gets delivered to the spam folder, so the instruction will be send to your mobile as well

Please select a Circle that you want people to invite to.
Invite to
(Maximum 500 email ids allowed.)