UNJUSTIFIED DEMANDS OF SO CALLED FARMER AGITATION

जब दो दो कौड़ी के आदमी देश के प्रधानमंत्री को गालियां देते हैं,
उनकी कब्र खोदने के नारे लगा सकते हैं ,
जलेबी खिलाने का लालच देकर गांव से महिलाओं को ट्रैक्टर में बिठाकर दिल्ली बार्डर पर मोदी को गालियां दिलवा सकते हैं,
तो हम अपने विचार रखने में क्यों हिचकें।देश मेरा भी है।
जिन के कारण और जिनको घोर कष्ट हो रहा है वो सब भी हमारे आत्मीयजन हैं।
मेरा किसी राजनैतिक पार्टी से कोई लेना देना नहीं।
सरकारें आती जाती रहती हैं ।
एक महिने से सुन सुन कर कान पक गए, किसान,
किसान,
किसान,
देश का अन्नदाता है,
पालनहार है।
किसान खेती नहीं करेगा तो देश भूखा मर जायेगा।
अरे ऐसे तो जो भी जो व्यक्ति कार्य करता है उसकी अबश्यकता होती है, डॉक्टर डाक्टरी ना करे, मास्टर मास्टरी ना करे, टेलर कपड़े ना सिले, सिपाही रक्षा ना करे......... अनगिनत कार्य है ।
कोई मुझे ईमानदारी से बतायेगा कि यदि किसान खेती नहीं करेगा तो किसान का परिवार बचेगा?
उसके परिवार का लालन पालन हो जायेगा?
उसके बच्चों की फीस कपड़े दवाई सब कहां से आयेगा ? कपड़े कहाँ से लाएगा, अन्य आवश्यकता की वस्तुएँ कहाँ से लाएगा,
मानते हैं वो कड़ी मेहनत करके अन्न उगाता है तो क्या मुफ्त में बांटता है?
बदले में उसका मूल्य नहीं लेता क्या?
फिर वह दुनिया का पालनहार कैसे माना जाये?
दुनिया का हर व्यक्ति रोजगार करके चार पैसे कमा कर अपना परिवार पालता है।और प्रत्येक कार्य का अपनी जगह अपना महत्व है ..।
तो किसान का रोजगार है खेती करना। सच्चाई तो ये है उन्हे खेती के अलावा और कुछ आता ही नहीं,
और जिन्होंने कुछ सीख लिया कुछ अच्छा कमा लिया उन्होंने खेती करनी ही छोड़ दी।कोई आढत की दुकानदारी करता है,
तो कोई प्रोपर्टी का धन्धा करता है,
तो कोई हीरो होन्डा आदि की ऐजेन्सी लिये बैठा है,
तो कोई रोड़ी बदरपुर सीमेंट ही बेच रहा है।
और नहीं तो मुर्गा फार्म खोले बैठा है यानि सबसीडी के चक्कर में जोहड़ में मछली ही पाल रहा है।
उन्हें क्या किसान कहेंगे?
36 प्रकार की सबसिडी किसानों को मिल रही है,
6000 वार्षिक खाते में में आ रहे हैं,
माता पिता पैन्शन ले रहे हैं,
आये गये साल कर्जे माफ करा लेते हैं,
फिर कहते हैं मोदी तेरी कब्र खुदेगी।
किसी रिक्शा वाले की,
किसी ऑटो वाले की,
किसी नाई की,
किसी दर्जी की,
किसी लुहार की,
किसी साइकिल पेन्चर लगाने वाले की,
किसी रेहड़ी वाले की,
ऐसे न जाने कितने छोटे रोजगारों की कोई सबसिडी आई है आज तक?
किसी का कर्जा माफ हुआ है आज तक? क्या ये लोग इस देश के वासी नही हैं?
कल को ये भी आन्दोलन करके कहेंगे देश के पालनहार हम ही हैं।
रही बात MSP की 😀😀 कल हलवाई कहेंगे
सरकार हमारे समोसे की एम एस पी 50 रुपये निश्चित करो।
चाहे उसमें सड़े हुए आलु भरें।
हमारे सब बिकने चाहियें।
नहीं बिके तो सरकार खरीदे,
चाहे सूअरों को खिलाये।
हमें समोसे की कीमत मिलनी चाहिए ।परसों बिरयानी वाले कहेंगे एक प्लेट बिरयानी 90 रुपये एम एस पी रखो चाहे उसमें कुत्ते का मांस डालें या चूहों का सब बिकनी चाहिये।
जो नहीं बिके उसे खट्टर और दुष्यंत खरीदें और पैसे सीधे हमारे खाते में जमा हों।
ये सब तमाशा नहीं तो क्या हो रहा है।
दिल्ली में जो त्राहि त्राहि हो रही है,
ना दूध पहुंच रहा है,
ना सब्जी पहुंच रही है,
ना कर्मचारी समय पर पहुंच पा रहे हैं उनकी ये दशा बनाने का क्या अधिकार है इन तथाकथित किसानों का?
सत्य कड़ुवा होता है
*पंजाब वाले घेराव करते अपने मन्त्रियों का*
और
*हरियाणा वाले अपने मन्त्रियों का।*
दिल्ली को घेर कर आम आदमी को क्यों परेशान किया जा रहा है more  

Farmers denying SC Directive Orders Following Congress instigations . SC TO ESTABLISH AUTHORITY OF CONSTITUTION AND THE Supreme Court more  
Adament attitude on Laws, GOI, Supreme Court Directions, Judicial Committee cannot farm part of Right of Article 19.
Understanding these 4 and Honouring Authorised Opinion of Agricultural Experts of Agricultural Universities IS A MUST TO ALL FARMER UNIONS and Leaders Heading or Supporting the Protests AND NOT ANY KIND OF ADAMANT ATTITUDE.
General Public which are living majority NEED CAPPING OF MAXIMUM RETAIL CONSUMER PRICE . This Requires Removal of Middlemen Monopoly, Contractors' Conspiracy, as well as Businessmen's Selfish Profiteering. more  
Modi became a dictatorial with the implementation of National Disaster Management Act using the alibi of coronavirus to implement nationwide, over 2 month long lockdown. Lockdown announced with a 4 hours notice! Without much deliberation the farm bills were passed.
No really big industry or agro-industries set up in Punjab as agriculture alternative. Modi should have industrialised Punjab or at least. Right now, farmers are waiting out in cold their agitation. Nothing "so called" about agitation. Some sensitivity needed.
Farmers insecure about change, that tomorrow their this security will go away. Their education allows them vision till the next crop harvest alone. No farmer is lazy. They are hardworking, and deserve that assurance. Shastri ji's call, "Jai Jawaan Jai Kisaan" remember. The former done with implementing "one rank one pension", apparently at least. That too was deserved.
Government must understand from their high vantage point that village people think in terms of survival.
Sarkaar apne "Mann ki baat" kare ke ilaava "ehsaas" ki bhi aur baaton ko samjhe! more  
Only Marshall Rule is the One and Only Remedy to Curb Dirty Politics of our Politicians and supporting Businessmen more  
via_LocalCircles_Market_chinese_handlers___20210110111011___.bmp
Indian Farmers are Independent Citizens but not Nominees of Independent India.

Ongoing sectional and partisan Farmers’ protests with unsound public demands going over and above the head of the Central Government of India are a counter-pointer to the saying that Indian Farmers are Independent Citizens of Independent India. Are they claiming themselves the ‘Nominees’ of Independent India?

In bitterly cold conditions with provisions and tents assembled for 6-months and acting dare-devil against the air-borne killer-virus-carona, they are proud to conduct their protests meaning that they are the forces present on a battlefield to confront the educated democracy of Independent India unbecoming of their
Individualistic Civil & Constitutional liberties. Are they claiming themselves the ‘Nominees’ of Independent India?

‘Unity with collective suffering’ does not make the 'Unity with collective Wisdom’.

Out of so many Farmers who are suffering, there are many who are actually inquiring hidden about their position, as to what they are, why they are there put into an awkward position, and so on.

Indian Agriculture and Agricultural Incomes have been declared long back as an Industry with the exponential growth of agricultural commerce, agricultural trade, agricultural businesses, and agricultural technologies supported by agricultural
engineering manufacturers.

As against such prospects, are the agitating minority Farmers claiming themselves the ‘Nominees’ of Independent India & Indian Agriculture? more  
via_LocalCircles_Screenshot_20210110-205915___20210110090318___.jpg
via_LocalCircles_Screenshot_20210110-205852___20210110090325___.jpg
यह दोनों सरकारी नोटिफिकेषन जरूर देखना पडेगा उन सब लोगोंने । more  
Post a Comment

Related Posts

Share
Enter your email & mobile number and we will send you the instructions

Note - The email can sometime gets delivered to the spam folder, so the instruction will be send to your mobile as well

Please select a Circle that you want people to invite to.
Invite to
(Maximum 500 email ids allowed.)